मैं बिक्री कर विभाग में अपीलीय अधिकारी था. स्टेनो के रूप में जो महिला कर्मचारी मिलीं, उन का नाम मीरा था. मीराजी शौर्टहैंड भी जानती थीं और टाइपिंग भी. आखिरकार विभाग में स्टेनो के पद पर थीं. यह दूसरी बात है कि या तो वे कहीं खोई रहती थीं या उन की शौर्टहैंड और टाइपिंग की आपस में बनती नहीं थी. यह भी हो सकता है कि ‘लिखें आप और समझें ऊपरवाला’ की तर्ज पर उन की ‘शौर्टहैंड’ ढली हो. कुछ भी हो, अर्थ का अनर्थ करने या फिर सस्पैंस पैदा कर देने, जिस में डिक्टेशन देने वाला बड़ी देर तक यह सोचता, खोजता, अनुमान लगाता रह जाए कि आखिर उस ने कहा क्या था, में माहिर थीं मीराजी. कुछ खास मौकों पर तो उन की बानगी देखने लायक है. आप भी मुलाहिजा फरमाइए :

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