जब राजनाथ सिंह जी ने राफेल के पहियों के नीचे नींबू रखे थे तब से मेरी टोने टोटकों में आस्था बढ़ रही है. इसके पीछे एक व्यक्तिगत अनुभव या संक्षिप्त कहानी यह है कि अपनी जवानी के दिनों में मेरा दिल माया नाम की एक सहपाठिन पर आ गया था लेकिन वह राम को चाहती थी. राम और माया में फूट डालने मैंने और मेरे चंद लंपट दोस्तों ने साम, दाम, दंड, भेद सब का सहारा लिया लेकिन दोनों पर कोई फर्क नहीं पड़ा. माया के चालचलन को लेकर मेरे गुट ने खूब दुष्प्रचार किया और एकाध बार अकेले में ले जाकर राम की खूब कुटाई भी की पर वे अपने लैला मजनू छाप प्यार के रास्ते से हटने तैयार नहीं हुए.

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