लेखक: ईश्वर दयाल जायसवाल

गुलाबचंद ने पास बैठी अपनी श्रीमतीजी से पूछा, ‘‘यह न्योता किस का है?’’

श्रीमतीजी बोलीं, ‘‘आप के बचपन के लंगोटिया यार मंत्रीजी आज ही दे गए हैं. उन के लाड़ले की शादी अपने इलाके के सांसदजी की बेटी से चट मंगनी पट ब्याह वाली तर्ज पर तय हो गई है. आप को बरात में चलने के लिए कह गए हैं.’’

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