बीवी से परेशान तो तब से ही हूं जब से उस के साथ सात फेरे लिए थे पर आज जब औफिस से थकाहारा घर पहुंचा तो द्वार पर बीवी मुसकराती दिखी तो हैरानी हुई. लगा, जैसे आज मैं अपने घर के द्वार पर नहीं, गलती से किसी और के द्वार पर आ खड़ा हो गया हूं. जब आंखों से चश्मा हटा कर देखा तो मुझे यकीन हो गया कि मैं अपने ही घर के द्वार पर आ खड़ा हूं. बीवी पहली बार द्वार पर स्वागत के लिए आतुरता से स्वागत की मुद्रा में दिखी तो मेरी प्रसन्नता की सीमा न रही. अरे भाईसाहब, यह क्या हो गया, क्या सूरज आज पश्चिम की जगह पूरब में अस्त हो रहा होगा? पूरब की ओर देखा तो वहां कोई सूरज न दिखा.

Digital Plans
Print + Digital Plans
COMMENT