‘बेटा, 100 साल जिओ.’

‘भगवान तुम्हें लंबी उमर दे.’

‘दूधों नहाओ पूतों फलो.’

आप को ये आशीर्वादी वचन कैसे लगे?

आप सोचेंगे कि क्या प्रश्न है. आशीर्वाद तो आशीर्वाद ही है. इस में अच्छा या बुरा लगने जैसा कुछ भी नहीं है, पर आज के जमाने में ये आशीर्वाद अपना अर्थ खो चुके हैं. आज ये आशीर्वाद एक बददुआ से कम नहीं है. आप को भी जब इन का छिपा अर्थ समझ में आएगा तो आप भी मेरे साथ सहमत हो जाएंगे.

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