लेखक-उग्रसेन मिश्रा, नसीम अंसारी कोचर, सोमा घोष, रोहित

ब्लैक फंगस इन्फैक्शन या म्यूकरमाइकोसिस कोई रहस्यमय बीमारी नहीं है, लेकिन यह अभी तक दुर्लभ बीमारियों की श्रेणी में गिनी जाती थी. भारतीय चिकित्सा विज्ञान परिषद के मुताबिक म्यूकरमाइकोसिस ऐसा दुर्लभ फंगस इन्फैक्शन है जो शरीर में बहुत तेजी से फैलता है. इस बीमारी से साइनस, दिमाग, आंख और फेफड़ों पर बुरा असर पड़ता है. कोरोना से जू झ रही देश की जनता अब नई बीमारी म्यूकरमाइकोसिस यानी ब्लैक फंगस की चपेट में है.

यह दुर्लभ किस्म की बीमारी कोरोना से उबरे उन मरीजों में तेजी से पनप रही है, जिन के इलाज में स्टेरौयड्स का इस्तेमाल हुआ है. कोरोना से रिकवर हो चुके कई लोगों के लिए यह दुर्लभ संक्रमण जानलेवा साबित हो रहा है. ओडिशा में इस का पहला केस मिला था. इस के बाद गुजरात और राजस्थान में सामने आने के बाद पूरे देश से ब्लैक फंगस इन्फैक्शन के केस सुनाई देने लगे हैं. मध्य प्रदेश के जबलपुर से महाराष्ट्र के ठाणे तक में इस वजह से लोगों की जानें जा रही हैं. सब से ज्यादा उत्तर भारत में इस का प्रकोप है. उत्तर प्रदेश में तो ब्लैक फंगस कहर बनने की राह पर है. भले ही सरकार आंकड़े पूरी तरह स्पष्ट न कर रही हो, लेकिन किसी मर्ज को खत्म करने की पहली शर्त ही उसे उजागर करना है. रिपोर्ट लिखे जाने तक भारत में कुल 11,717 सरकारी मामले सामने आ चुके हैं,

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जिस में महाराष्ट्र में 2,770, गुजरात में 2,869, आंध्र प्रदेश में 779, मध्य प्रदेश में 752 और तेलंगाना में 744 मुख्य हैं. इसी प्रकार उत्तर प्रदेश में इस बीमारी के 701 मरीज मिले हैं, जिस में से 20 से अधिक लोगों की मौतें दर्ज की गई हैं. हालांकि कई लोगों का कहना है कि उत्तर प्रदेश के आंकड़ों पर चुनाव का असर भी हो सकता है. मथुरा व कानपुर में 2 और लखनऊ में 10 मरीजों की मौत हो चुकी है. लखनऊ केजीएमयू यूनिवर्सिटी के मुताबिक, ब्लैक फंगस की चपेट में आए 124 मरीज केजीएमयू में भरती हैं. कइयों की आंखों की रोशनी पर असर आ चुका है. जरूरी दवाएं दी जा रही हैं. इन में कइयों की रोशनी काफी हद तक प्रभावित है. वाराणसी में भी 84 मामले सामने आए हैं, जिन में 6 की मौत की पुष्टि हुई है. स्टेरौयड लेने वाले कोरोना मरीज इस वक्त हाई रिस्क पर हैं. क्या है ब्लैक फंगस ब्लैक फंगस इन्फैक्शन या विज्ञान की भाषा में म्यूकरमाइकोसिस कोई रहस्यमय बीमारी नहीं है,

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