क्या हैं - हेपटाइटिस एक ग्रीक शब्द हैं. हेपेटिक(लीवर) और आइटिस (सूजन) को मिलने से बना हैं.लिवर हमारे शरीर का अहम हिस्सा हैं. खाना पचाने मे मदद करने ,ब्लीडिंग रोकना ,एनर्जी स्टोर करने और इंफेक्शन से लडना इसका अहम काम हैं. लिवर मानव शरीर का एक अद्भूत अंग हैं , इस अंग का खासियत हैं कि किसी तरह का नुकसान होने पर खुद ही भरपाई कर लेता है.अगर लिवर मे लम्बे वक्त तक सूजन या इंफेक्सन रहे तो लिवर को स्थाई तौर पर नुकसान पहुच सकता हैं. लिवर में इसी तरह की बीमारी हैं:- हेपटाइटिस .

कई प्रकार:हेपटाइटिस एक तरह का वायरस हैं. ए ,बी , सी ,डी और ई हेपटाइटिस वायरस अलग-अलग से गुणों वाली होती हैं. हेपोटाइटिस के ए.बी.सी. और ई मूल वायरस हैं तथा ड़ी वायरस बहुत कम मामलो में सामने आता हैं , इसलिए इसे डेल्टा वायरस है.

समान्यतहः लक्षण और नुकसान के आधार पर हेपोटाइटिस के डी और बी , ए और ई एवम् बी और सी वायरस को एक साथ रखा जा सकता हैं.

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डी और बी:ड़ी वायरस बहुत कम मामलो में सामने आता हैं, और यह वायरस अगर बी से मिलता कर प्रतिकिया करता हैं तो काफी घातक होता हैं.अमूमन मामलों में ही इनका सयोग होता हैं,अगर इनका सयोग होता हैं तो लिवर पर तेज प्रहार का खतरा होता हैं , कई मामलों में यह प्रहार इतना घातक होता हैं कि पेंट के कैसर  होने की संभावना हो जाती हैं.

ए और ई:ए और ई  वायरस  पानी और खाने के जरिए शरीर में आता हैं.उल्टी ,बुखार और पीलिया का होना ,इसका लक्षण हैं.2-6 सप्ताह में इस इन्फेक्शन का लक्षण सामने आता हैं. इस तरह के इंफेक्शन में एक बात खास होती हैं कि यह अधिक दिनो तक जीवित नही रहते हैं.अधिकतर मामलो में इस तरह का इन्फेक्शन खुुद ब खुद खत्म हीे जाता हैं.एका- दुका मामलो में ही यह इन्फेक्शन खतरनाक होता हैं.

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