सत्रहवीं शताब्दी के एक अंगरेज कवि जार्ज हर्बर्ट ने एक बार लिखा था कि सभी सुगंधों में ब्रेड की महक और जीवन के सभी स्वादों में नमक का स्वाद सर्वोपरि होता है. नमक डालते ही किसी भी पकवान के स्वाद में एक आश्चर्यजनक परिवर्तन आ जाता है, लेकिन स्वाद का यह संतुलन नमक के संतुलन पर ही निर्भर करता है. एक ओर जहां जरा सा ज्यादा नमक किसी भी भोजन के स्वाद को बिगाड़ देता है वहीं दूसरी ओर नमक जरा सा कम हुआ तो सब मुंह बिचकाने लगते हैं. रसोईघर की इस महत्त्वपूर्ण चीज से एक वैज्ञानिक पहलू भी जुड़ा हुआ है. अनेक वैज्ञानिक प्रयोगों से यह बात सिद्ध हो चुकी है कि अत्यधिक नमक हमारे शरीर के लिए बहुत हानिकारक होता है और यह कुछ मामलों में जानलेवा भी साबित हो सकता है.

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