दिल्ली के मयूर विहार में रहने वाला 27 वर्षीय सौरभ रोजाना सुबह एक बैग पीठ पर टांग कर घर से निकल पड़ता है. देखने से तो लगता है कि औफिस जा रहा है लेकिन उस की ड्रैस कुछ और ही बताती है. ट्रैक सूट और स्पोर्ट्स शूज पहन कर सौरभ घर से निकल पड़ता है और करीब एकडेढ़ घंटे बाद वापस भी आ जाता है. आखिर वह जाता कहां है? एक दिन सौरभ के पड़ोसी ने जब उस से पूछा तब पता चला कि वह रोजाना रकिंग के लिए जाता है. सुनने में अजीब लगने वाला यह शब्द इन दिनों फिटनैस प्रेमियों के बीच खासा प्रचलित हो रहा है. रकिंग का अर्थ है अपनी पीठ पर वजन लाद कर समूह में चलना. यह वजन कम करने में मददगार है और शरीर को मजबूती भी प्रदान करता है.

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