‘‘मैं जब सिर्फ 3 महीने का था तो मेरे माथे पर एक छोटी सी चोट लगने से काफी देर तक खून बहता रहा. खून लगातार बह रहा था. पहले तो मातापिता ने इस ओर ज्यादा ध्यान नहीं दिया लेकिन जब काफी कोशिशों के बावजूद खून बंद नहीं हुआ तो वे मुझे अस्पताल ले गए. वहां डाक्टरों ने खून की जांच करवा कर बताया कि मुझे हीमोफीलिया की बीमारी है. उस समय इस बीमारी के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं थी. और न ही इस रोग के डाक्टर उपलब्ध थे. तब हीमोफीलिया के विशेषज्ञ ही उपचार किया करते थे. ऐसे विशेषज्ञ से मेरा भी इलाज चलता रहा.

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