Career Selection: चयन करने में यदि व्यावहारिक रुख इख्तियार न किया जाए तो परिणाम निराशाजनक हो सकता है और यह निश्चित रूप से उचित नहीं है. सो, आवश्यकता इस बात की है कि कैरियर चुनने में कुछ बातों का ध्यान रखा जाए.
रुचि का खयाल रखें
कई मामलों में देखा गया है कि छात्र रुचि के विपरीत कैरियर चुनते हैं. ऐसे में स्वाभाविक है कि वे उस काम में शतप्रतिशत ध्यान नहीं देंगे और बेहतर परिणाम नहीं आ पाएगा. उस के मन में हमेशा आत्महीनता की भावना आती रहेगी.
क्षमता का खयाल रखें
सिर्फ रुचि होना ही पर्याप्त नहीं है. क्षमता की भी महत्त्वपूर्ण भूमिका होती है किसी कार्य को करने के लिए. सिर्फ मानसिक क्षमता ही नहीं बल्कि शारीरिक क्षमता भी महत्त्व रखती है. यदि आप प्रशासनिक सेवा, मैडिकल, इंजीनियरिंग, चार्टर्ड अकाउंटैन्सी आदि की पढ़ाई करना चाहते हैं लेकिन उस के लिए जितनी मेहनत करने की आवश्यकता है उतनी किसी कारण से नहीं कर पाएंगे तो फिर सफलता संदिग्ध हो जाती है और तनाव अलग से बन जाता है. सो, क्षमता को ध्यान में रख कर ही उसे कैरियर चुनें.
विचार में लोचनीयता रखें
यदि रुचि और क्षमता के अनुसार किसी लक्ष्य को हासिल करना बहुत ही मुश्किल हो और उस लक्ष्य को पाने के चक्कर में शारीरिक व मानसिक स्वास्थ्य पर दुष्प्रभाव पड़ रहा हो तो बेहतर है कि लक्ष्य को बदल लिया जाए या लक्ष्य को थोड़ा नीचे कर लिया जाए. सिद्धांत और व्यवहार 2 अलगअलग बातें हैं. व्यवहार में लोचनीयता का बहुत महत्त्व है. हर व्यक्ति के लिए यह संभव नहीं है कि वह किसी भी स्थान पर शिखर पर ही रहे.
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