ब्राजील के रियो डि जेनेरियो में आयोजित पैरालिंपिक में विजेताओं की जितनी प्रशंसा की जाए,कम है. सब की कहानी एक से बढ़ कर एक. किसी के हाथ नहीं हैं तो किसी के पैर काम नहीं करते, तो कोई रीढ़ की हड्डी से लाचार है पर इन शारीरिक परेशानियों को इन्होंने कमजोरी नहीं समझा, बल्कि इन्हीं कमजोरियों को इन्होंने हथियार बनाया और अपनेअपने सपनों को पूरा किया.

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