जमैका के मशहूर धावक उसेन बोल्ट ने कहा है कि अगले साल ओलिंपिक के बाद वे अपने सुनहरे कैरियर को अलविदा कह सकते हैं. उन्होंने कहा कि लंदन में 2017 में होने वाली विश्व चैंपियनशिप में उन के भाग लेने की संभावना 50-50 है और वह रियो ओलिंपिक के बाद रिटायर हो सकते हैं. जमैका के इस धावक का वाकई जवाब नहीं. उन्होंने रफ्तार की दुनिया में किसी को आगे नहीं बढ़ने दिया और एक खासा मुकाम हासिल किया. भारत में अगर मिल्खा सिंह को छोड़ दें तो शायद ही किसी और धावक का नाम जेहन में आता है. ऐसा इसलिए भी है क्योंकि हमारे देश में एकाध खेलों को छोड़ कर बाकी खेलों के साथ सौतेला व्यवहार किया जाता है. मिल्खा सिंह और उसेन बोल्ट यहां और भी मिल सकते हैं लेकिन मैट्रोपोलिटन शहर के पांचसितारा होटल में बैठ कर ढूंढ़ने से ऐसी प्रतिभाएं नहीं मिलेंगी. इस के लिए गांव और कसबों में उन्हें तलाशना होगा क्योंकि कई ऐसे धावक गांव, कसबों में होते हैं जो स्कूलों की प्रतियोगिता तक ही सीमित रह जाते हैं क्योंकि उन्हें रास्ता दिखाने वाला कोई नहीं होता या फिर वे आर्थिक तंगी की वजह से वहीं सिमट कर रह जाते हैं. खेल अधिकारियों और खेल प्रशासन को इस ओर ध्यान देना चाहिए ताकि खेल के क्षेत्र में खिलाड़ी आगे बढ़ सकें. आज एक दिक्कत खेलों के साथ यह भी हो रही है कि जिस खेल में पैसा दिखता है उसी खेल को ज्यादा महत्त्व दिया जा रहा है. बाकी खेलों का बेड़ा गर्क हो रहा है. इस पर किसी का ध्यान नहीं जा रहा है.

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