आलूबुखारे को अंगरेजी में प्लम भी कहा जाता है. कहींकहीं इसे अलूचा के नाम से भी जाना जाता है. इस का वानस्पतिक नाम प्रूनस डोमेस्टिका है. यह एक पर्णपाती पेड़ है. खाने में यह खट्टामीठा स्वाद लिए होता है और सेहत के लिए बहुत ही लाभकारी है क्योंकि इस में विटामिनों से भरपूर होने के अलावा कई पोषक तत्व मौजूद होते हैं.

जहां एक ओर देश कोरोना काल में कई क्षेत्रों में मंदी की मार झेल रहा है, वहीं कुल्लू के सेंटारोजा वैरायटी के प्लम यानी आलूबुखारा ने लंबी छलांग लगाई है. प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में कारगर इस प्लम को दशकों बाद रिकौर्ड 92 रुपए प्रति किलो दाम मिल रहे हैं.

वहीं दूसरी ओर औषधीय कंपनियों में भी इस प्लम की खासी मांग है. अच्छे दाम मिलने से कुल्लू घाटी के बागबान खुश हैं. पिछले दिनों सब्जी मंडी में प्लम यानी आलूबुखारा 92 रुपए प्रति किलो बिका.

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भले ही इस साल प्लम की पैदावार कम हुई है. लिहाजा, मांग बढ़ने से इस की कीमतों में काफी उछाल आया है. एक प्रगतिशील बागबान ने बताया कि आज तक ऐसे उम्दा दाम प्लम के कभी नहीं मिले हैं. इस साल प्लम की सेंटारोजा वैरायटी ने कई दशकों का रिकौर्ड तोड़ा है. पिछले साल यह प्लम 45-50 रुपए किलो में बिका था. इस बार प्लम के अच्छे दाम मिल रहे हैं. वजह, कोरोना के चलते इस प्लम की काफी मांग है.

वहीं बागबानी विभाग के विशेषज्ञों का मानना है कि प्लम में कैलोरी 30 ग्राम, विटामिन सी 10 फीसदी, विटामिन ए 5 फीसदी और विटामिन के 5 फीसदी होती है. इस में कौपर और पोटैशियम भी मौजूद है. शरीर में प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के साथ हृदय रोग, हड्डियों व सूजन जैसी कई बीमारियों के लिए प्लम एक बेहतर फल है.

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