कुछ साल पहले तक देश के तमाम किसान मौसम की जानकारी के लिए पुराने पारंपरिक तरीकों से ही अनुमान लगाते थे, जैसे हवा चलने का रुख आसमान को देख कर या पक्षियों के व्यवहार को देख कर या उन का खुद का अनुमान था, जिस के आधार पर वह मौसम के बारे में अनुमान लगा सकते थे. उसी अनुमान के आधार पर वह अपने खेतों काम करते थे, चाहे वह बीज बोआई का काम हो, खेत में पानी देने का काम हो या फसल गहाई का काम हो, लेकिन पुराने तरीके से अनुमान लगाना कभीकभी गलत भी हो जाता था. लेकिन उस समय इस के अलावा कोई चारा भी नहीं था, क्योंकि उस समय मौसम की जानकारी देने के लिए कोई ऐसा सटीक इंतजाम भी नहीं था, जिस से किसानों को जानकारी मिल सके.

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