लेखक-भानु प्रकाश राणा

खेती के साथसाथ अनेक ऐसे काम किए जा सकते हैं, जो किसानों को अतिरिक्त मुनाफा तो देते ही हैं, साथ ही रोजगार भी मिल जाता है. ऐसा ही काम है पशुपालन, जो किसानों के लिए बेहतर आमदनी का जरीया हो सकता है. सरकार की भी अनेक योजनाएं पशुपालन के क्षेत्र में आती रहती हैं, जो किसानों की राह आसान बनाती हैं. पिछले कुछ समय में भारत सरकार ने किसानों और पशुपालकों को ले कर लगातार योजनाएं लौंच की हैं. केंद्र सरकार ने आत्मनिर्भर भारत के तहत पशुपालन अवसंरचना विकास निधि यानी एनीमल हसबैंडरी इंफ्रास्ट्रक्चर डवलपमैंट फंड (एएचआईडीएफ) के लिए 15,000 करोड़ रुपए भी आवंटित किए हैं.

योजना के उद्देश्य

* दूध और मांस प्रसंस्करण की क्षमता और उत्पाद में विविधीकरण को बढ़ाना.

* पशुपालकों को दूध और मांस पर सही रेट उपलब्ध कराना.

* घरेलू उपयोग के लिए गुणवत्तापूर्ण दूध और मांस उत्पाद उपलब्ध कराना.

* देश की बढ़ती आबादी की प्रोटीन समृद्ध गुणवत्ता वाले भोजन की आवश्यकता को पूरा करना.

* कुपोषण को खत्म करना.

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* उद्यमिता विकसित करना और रोजगार पैदा करना.

* दूध और मांस के क्षेत्र में निर्यात योगदान बढ़ाने के लिए.

* मवेशियों के लिए सस्ते दाम पर चारा मुहैया कराना. लगा सकते हैं पशुओं से जुड़े उद्योग किसान केंद्र सरकार की पशुपालन अवसंरचना विकास निधि यानी एनीमल हसबैंडरी इंफ्रास्ट्रक्चर डवलपमैंट फंड (एएचआईडीएफ) के माध्यम से लोन ले कर पशुओं से जुड़े कई उद्योग लगा सकते हैं.

इन उद्योगों को लगाने के लिए वे बैंकों से लोन के रूप में 90 फीसदी तक की वित्तीय सहायता बाजार से कम ब्याज दर पर ले सकते हैं. साथ ही, किसान उद्यमी मित्र पोर्टल पर जा कर उन बैंकों की सूची भी देख सकते हैं, जो इस तरह के लोन की सुविधा देते हैं. इन उद्योगों यानी निर्माण इकाइयों के लगाने पर पशुपालन विभाग की तरफ से लोन की सुविधा दी जा रही है :

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