झारखंड की पथरीली जमीन पर लीची पैदा करने की कवायद शुरू की गई है. फिलहाल राज्य के कुछ हिस्सों में ही लीची की पैदावार होती है. लीची की मांग बढ़ने की वजह से अब नएनए इलाकों में लीची के उत्पादन की कोशिशें शुरू की गई हैं. झारखंड जैसे पहाड़ी राज्य में वैज्ञानिक तरीके से लीची की खेती की शुरुआत की गई है. लीची के लिए सामान्य पीएच मान वाली गहरी बलुई दोमट मिट्टी मुनासिब होती है. जहां मिट्टी की पानी रखने की कूवत ज्यादा होती है, वहां लीची की बेहतर पैदावार होती है. अब हलकी अम्लीय और लेटराइट मिट्टी में भी लीची की खेती होने लगी है  झारखंड के कृषि वैज्ञानिक डाक्टर मथुरा राय बताते हैं कि झारखंड के बागबानी एवं कृषि वानिकी शोध कार्यक्रम ने लीची की स्वर्ण रूपा किस्म को झारखंड के लिए मुनासिब करार दिया है. यह छोटा नागपुर के पठारी इलाके के लिए बहुत ही मुनासिब है. इस किस्म की लीची के फल चटखन की समस्या से मुक्त होते हैं. इस के फलों का रंग गुलाबी होता है और आकार छोटा होता है. इस के फल काफी मीठे होते हैं.

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