साल के आखिरी लमहों की याद दिलाने वाले दिसंबर महीने में जहां एक ओर साल खत्म होने की कसक छिपी होती है, तो दूसरी ओर नएनवेले साल के आगमन का जोश भी छिपा होता है. फिर आनाजाना तो कुदरत का नियम है, लिहाजा कर्मयोगियों को अपने काम से ही मतलब होता है. जज्बातों से जुड़े बेहद ठंडे महीने दिसंबर में भी खेतीकिसानी की दुनिया का खजाना छिपा है. जागरूक किस्म के किसानों के लिए दिसंबर की अहमियत भी बहुत ज्यादा है. दिसंबर की कड़ाके की हाड़ कंपा देने वाली सर्दी से जिम्मेदार किस्म के किसानों पर कोई फर्क नहीं पड़ता. वे तो अपना गमछा व कंबल ओढ़े लगातार खेतों की खैरखबर लेते रहते हैं, उन्हें सींचते हैं और सफाई वगैरह का खयाल रखते हैं.

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