डा. नवीन कुमार बोहरा

पर्यावरण के प्रति लोगों में पिछले कुछ सालों से जागरूकता बढ़ी है और बडे़ पैमाने पर वृक्षारोपण यानी पेड़ लगाने के कार्यक्रम किए जा रहे हैं. पर दुख की बात है कि हर साल लगाए जाने वाले पौधों में आधे से ज्यादा पौधे तो किसी न किसी वजह से बेकार हो जाते हैं और बाकी बचे पौधों में भी कुछ अल्पविकसित होते हैं और कुछ सही तरह से पनप पाते हैं.

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