आज के समय में खेती करने के तौरतरीकों में खासा बदलाव आ चुका?है. पारंपरिक तरीके से की जाने वाली खेती में अब मशीनों का ज्यादा इस्तेमाल होने लगा है, जिस से फसल उत्पादन में तो बढ़ोतरी हो ही रही?है, खर्चा भी कम हो रहा है और फसल की गुणवत्ता में सुधार हो रहा है. निराईगुड़ाई के काम में पहले किसानों का पूरा परिवार खेत में जुट जाता था. जरूरत होने पर बाहर के मजदूरों से भी काम लेना पड़ जाता था, जिस से मजदूरी भी बढ़ जाती थी. इस काम को करने के लिए कईकई दिन लग जाते थे, लेकिन अब निराईगुड़ाई के लिए हाथ से चलने वाली मशीनों से ले कर ट्रैक्टर में जोड़ कर चलने वाले तमाम यंत्र बाजार में मौजूद हैं. इन यंत्रों को किसान अपनी जरूरत के हिसाब से खरीद सकते हैं. छोटे जोत वाले किसानों के लिए कम कीमत वाले यंत्र और बड़े किसानों के लिए बड़े यंत्र बाजार में तैयार मिलते?हैं. इन को किसान अपनी जरूरत और पसंद के मुताबिक ले सकते?हैं.

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