चाहे कैरियर की बुलंदियां छूने का जज्बा हो या सामाजिक रिश्तों को निभाने की बात, किशोरों ने हर प्लेटफौर्म पर खुद को सर्वोपरि साबित किया है. इसी सामाजिक तानेबाने के चलते उन्हें रिश्तेदारों से रूबरू होने का भी मौका मिलता है. इन में से कुछ अपने सगे रिश्ते होते हैं जबकि कुछ मेलजोल के बाद मजबूत होते हैं. इन सब का घर पर आनाजाना भी लगा रहता है. घर आने वाले लोगों में कुछ अपने सगे रिश्ते मसलन, चाचाचाची, बूआफूफा, मामामामी होते हैं तो कुछ दूर के रिश्तेदार अथवा पेरैंट्स के जानपहचान वाले होते हैं. रिश्तेदारों के घर आने व उन्हें ठहराने को ले कर जहां एक ओर रोमांच होता है, वहीं उन की खातिरदारी की वजह से आप की भी जिम्मेदारी व भागदौड़ बढ़ जाती है. आज के किशोर कुछ तैयारियों के साथ रिश्तेदारों के अपने घर आगमन को यादगार बना सकते हैं. साथ ही खुद भी उन पलों का भरपूर आनंद उठा सकते हैं.

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