बच्चों की परवरिश का यह सब से बेहतर दौर है. आज उन्हें तमाम सुखसुविधाएं, साधन और आजादी मिली हुई है. उन्हें महंगी शिक्षा दिलाने में मांबाप लाखों रुपए खर्च करने से नहीं हिचकते क्योंकि उन की पहली प्राथमिकता संतान और उस का बेहतर भविष्य है. अभिभावकों की कमाई का आधे से ज्यादा पैसा बच्चों पर खर्च हो रहा है, यह कम हैरत की बात नहीं क्योंकि पहले ऐसा नहीं था, तब तसवीर कुछ और थी. अपने बच्चों के सुखसहूलियतों की खातिर मांबाप कोल्हू के बैल की तरह पैसा कमाने में जुटे हैं. इस की अहम वजह है अब बच्चे पहले की तरह थोक में नहीं 1 या 2 ही पैदा किए जा रहे हैं.

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