टे्रन आ चुकी थी. मैं रश्मि और निधि के साथ प्लेटफौर्म पर पहुंचा ही था कि निधि अपनी उंगलियों को छुड़ाती हुई चिल्लाई, ‘‘वे रहे दादादादी,’’ और दौड़ कर दादाजी से लिपट गई.

‘‘जय गुरुदेव, बच्चो,’’ मां ने आशीर्वाद की मुद्रा में हाथ उठाया.

रश्मि ने बढ़ कर मां के पांव छूते हुए कहा, ‘‘प्रणाम, मांजी.’’

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