‘क्यों?’

‘उन्हें कुछ बात करनी है.’

‘कैसी बात? मम्मी ने तो कभी अपने इस दोस्त के बारे में नहीं बताया... क्या आप भी इन्हें नहीं जानते थे?’

‘नहीं... कल आएंगे तब पता चलेगा कि क्या बात करनी है उन्हें.’ कह कर संजीव उठे और अपने कमरे की ओर चल दिये. आशीष वहीं बैठा रहा. आगन्तुक, जिनका नाम पापा ने अभय बताया था, के बारे में सोचता रहा. कौन हैं, कहां से आये, कहां रहते हैं, क्या बात करनी है उन्हें, पहले कभी क्यों नहीं आये, मां ने उनके बारे में कभी कुछ क्यों नहीं बताया, मुझसे इतने क्यों मिलते हैं... बहुतेरे सवाल उसके दिमाग में चक्कर काट रहे थे.

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