दिवाकर को एक ही मलाल था कि वह ज्यादा पढ़लिख नहीं पाए. अपनी इस कमी को ले कर उन्होंने घरवालों की आंखों में दूसरों के सामने शर्मिंदगी का एहसास देखा था. उसी शर्मिंदगी को गर्व में बदलना चाहते थे लेकिन यह कैसे संभव हो सकता था?

ठाणे के विधायक दिवाकर की कार में ड्राइवर के अलावा पिछली सीट पर दिवाकर उन की पत्नी मालिनी थीं. पीछे वाली कार में उन के दोनों युवा बच्चे पर्व और सुरभि और दिवाकर का सहायक विकास थे. आज दिवाकर को एक स्कूल का उद्घाटन करने जाना था.

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