सास को काटो तो खून नहीं. गुस्से और भय के मारे उसे कुछ सूझ नहीं रहा था. वह इरा के हाथपैर जोड़ने लगी, बोली, ‘‘बता किस का है? कहां गई थी?’’

‘‘मैं कहीं नहीं गई, आप ने ही भेजा था उसे...’’

‘‘मैं ने?’’ सास का सिर चक्करघिन्नी की तरह घूम गया, ‘‘किसे भेजा था मैं ने?’’ उन के सब्र का बांध पूरी बर्बरता से टूटा, वे जोर से चिल्लाईं, ‘‘कर्मेश? वह तो बच्चा है, पागल है...’’

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