पिछले 5 सालों में उमा भारती और सुषमा स्वराज के मंत्री पद पर रहते हुए भी अपने कार्यालयों या संसद में चाहे कोई विशेष योगदान न रहा हो पर फिर भी 2019 के लोकसभा चुनावों को न लड़ने की उन की खुल्लमखुल्ला घोषणा, वह भी 2018 में 5 राज्यों के चुनावों से पहले, कर देना यह साफ कर देता है कि भाषणबाजी के राज का असर कम हो रहा है.

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