अदालतों को विरोध बंद कराने के लिए किस तरह इस्तेमाल किया जा सकता है. उस का उदाहरण दिल्ली के एक अतिरिक्त जिला ऐशन जज के फैसले से स्पष्ट है. फरवरी 20 में हुए उत्तर पूर्व दिल्ली में ङ्क्षहदूमुस्लिम दंगों में पकड़े गए लोगों की जमानत को देना इंकार करते हुए न्यायाधीश ने कहा कि अगर एक सरकार विरोधी मोर्चे में कुछ दंगा होता है तो केवल दंगे करने वाले नहीं, हर जना जो उस मोर्चे में शामिल था, बराबर का अपराधी है.

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