मूलत म्यांमार में बसे पर बंगाली बोलने वाले रोहंग्या शरणर्थी सारे भारत में फैले हुए हैं और छोटेमोटे काम कर के गुजारा कर रहे हैं. बांग्लादेश व म्यांमार दोनों इस से परेशान हैं क्योंकि ये इस्लाम को मानने वाले बिना देश के लोग कभी बांग्लादेश में होते हैं, कभी म्यांमार में और कभी भारत में. भारत सरकार ने इन्हें विदेशी मान कर खदेडऩे की नीति अपना रखी पर खदेड़ कर कहां भेजा जाए, बांग्लादेश और म्यांमार दोनों लेने को तैयार भी तो नहीं. इन्हें क्या बंगाल की खाड़ी में जहाजों....डाल कर पटक दिया जाए जहां ये मर जाएं.

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