प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बिना अपने मंत्रिमंडल के सहयोगियों या मुख्यमंत्रियों की सहायता केअकेले धुआंधार प्रचार और रैलियां कर के एक बार फिर बहुमत हासिल कर अपने पर लगाए गए सारे आरोपों और अपनी प्रशासनिक व नीतिगत नीतियों की गलतियों पर आम वोटरों के समर्थन का मोटा लेप लगा लिया है. आम वोटर नोटबंदी व जीएसटी की तकलीफों और दलित उत्पीड़न व किसान आत्महत्याओं की घटनाओं के बीच एक सुरक्षित, परंपरावादी हुकूमत चाहता है क्योंकि उसे जो उन की कीमत देनी पड़ रही है वह महसूस ही नहीं हो रही.

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