आमतौर पर सरकारों के बननेबदलने से आम घरवालियों को फर्क नहीं पड़ता पर जब लगने लगे कि जो सरकार आप के घर में घुस रही है और आप को घर चलाने तक की नसीहत देने में लगी हो और उस सरकार के पांव लड़खड़ाने लगें तो थोड़ा सुकून मिलता है. कर्नाटक में सरकार न बना पाने पर और उस के बाद होने वाले उपचुनावों में 15 में से 12 सीटें हार जाने वाले नरेंद्र मोदी वही हैं जो कहते हैं कि चाय देर से मिलने पर पति को झगड़ने का हक नैतिक व नैसर्गिक दोनों हैं. श्रीमान नरेंद्र मोदी ने घरों में घुस कर लोगों से कहकह कर

सस्ते गैस सिलैंडर छुड़वाए और वाहवाही लेने की तर्ज पर एक औरत से कह डाला कि अब पति सिलैंडर होने के कारण चाय देर से मिलने के लिए डांटता तो नहीं होगा यानी उन का अर्थ था कि अगर चाय देर से मिले तो डांटना गलत नहीं है. इसी पार्टी के लोग कहते रहते हैं कि औरतों का बलात्कार होता है तो वे खुद ही जिम्मेदार होती हैं. इसी के समर्थक लोगों के घरों में घुस कर रैफ्रिजरेटर में झांकना हक समझते हैं कि वहां रखा मीट गाय का मांस तो नहीं है.

इसी पार्टी के लोग बिंदी जैसी छोटी चीज पर भारीभरकम जीएसटी को सही मानते हैं. इस पार्टी को मंदिरों, योगासनों, ब्राह्मणों की तो फिक्र है पर 4 सालों में इस ने औरतों के हित का एक भी कानून पास नहीं किया है. अगर तीन तलाक कानून पास हुआ है तो सिर्फ इसलिए कि हिंदू जमात को जताना था कि वह इसलामी कानूनों में दखल दे सकती है. असल में सरकारों के फैसले घरों को उसी तरह प्रभावित करते हैं जैसे व्यवसायों और कारखानों को. सरकारी फैसलों का असर एक घरवाली पर कैसे पड़ेगा, अगर कोई सरकार यह न समझ पाए तो वह निकम्मी है.

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