धर्म का काम धर्म के दुकानदारों का पेट भरना है, न कि आम लोगों को सही तरह जीवन जीने की राह सुझाना. भक्ति को भगवान से कुछ पाने का रास्ता न बना कर हमारे प्रवचनकर्ता भक्ति को ही अंतिम लक्ष्य बनाने में बेहद सफल हैं.

एक प्रवचन में बताया जाता है कि भगवान का खुद कहना है कि उन्हें पाने के लिए सब से पहले ??.............?? यानी ब्राह्मïणों के चरणों में बिछ जाएं. वैराग्य पैदा करें यानी जो कमायाधमाया है वह किसी को बांट दें और वह पाने वाला कोई और नहीं, बाह्मïण देवता है. वैराग्य से तुम में धर्म के प्रति प्रेम पैदा होगा, भगवानों की बेसिरपैर की लीलाओं में विश्वास हो जाएगा और उन के कामुक व्यवहार को अनदेखा कर के तुम भगवान के एजेंटों को देते रहोगे.

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