रिश्वत लेते हुए सरकारी अफसर पकड़ा जाए तो इस देश में उस का क्या इलाज है? बड़ा आसान है, रिश्वत दे कर छूट जाओ. हजारों रिश्वतखोर अफसर यही करते हैं और रिश्वतों का बाजार ऐसा ही गरम है जैसा ‘जौली एलएलबी’ फिल्म में थानों में नियुक्ति की बोली के रूप में दर्शाया गया है. हमारे यहां रिश्वतखोर अफसर तब पकड़ा जाता है जब वह अपने ऊपर के अफसरों को उन का सही हिस्सा नहीं देता. अगर पकड़ा जाए तो रिश्वत दे कर छूटने का उदाहरण अफसर बी एल अग्रवाल का सामने आया है जो छत्तीसगढ़ सरकार में प्रमुख सचिव हैं. 2010 में अग्रवाल के खिलाफ 2 मुकदमे केंद्रीय जांच ब्यूरो ने दर्ज किए थे जब वे स्वास्थ्य सचिव थे. आयकर विभाग वालों ने जांच कर पता किया था कि अग्रवाल के पास 93 करोड़ रुपए की संपत्ति है.

मामले को रफादफा करने के लिए बी एल अग्रवाल ने सोर्स ढूंढ़ने की कोशिश की और एक सय्यद बुड़हानुद्दीन ने उन्हें झांसा दिया कि वह प्रधानमंत्री कार्यालय में काम करता है और उस की फाइल नष्ट करा देगा. यह शख्स कभी ओ पी शर्मा, कभी ओ पी सिंह तो कभी इकबाल अहमद के नाम से कार्य करता है. एक प्रमुख सचिव की हैसियत पर काम करने वाले भारतीय जनता पार्टी की सरकार वाले राज्य में इस तरह की चोरी व सीनाजोरी दर्शाती है कि नरेंद्र मोदी का भ्रष्टाचारमुक्त भारत सिर्फ हवा में है. सरकारी लोग आज भी पैसा बना रहे हैं और जम कर बना रहे हैं. मनमोहन सिंह की सरकार भ्रष्टाचार के आरोपों के कारण गई पर इसलिए कि उस समय औडीटर जनरल ने भ्रष्टाचार के मामलों को बढ़ाचढ़ा कर प्रसारित करा दिए थे. मनमोहन सिंह और सोनिया गांधी इन पर प्रतिवाद नहीं कर पाए. हालांकि, मौजूदा सरकार के 3 साल के कार्यकाल के बाद भी एक भी नेता या अफसर कोयला या 2 जी घोटाले में सजा नहीं पा पाया है. नरेंद्र मोदी के बारे में कहा जा रहा है कि उन का कार्यालय भ्रष्टाचारमुक्त है पर यह भी तो संभव है कि वहां कार्यरत कर्मचारी गद्दारमुक्त न हों. यानी हर बात गुप्त है, भ्रष्टाचारमुक्त नहीं.

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