आखिर महाराष्ट्र हाईकोर्ट और मीडिया के सक्रिय होते ही 18 महीने बाद महाराष्ट्र के नवी मुंबई, कलंबोली पुलिस थाने के अफसरों ने 7 दिसंबर, 2017 की शाम को करीब 8 बजे अपने विभाग के शातिर और ऊंची पहुंच वाले अफसर अभय कुरुंदकर को उस के मीरा रोड स्थित घर से गिरफ्तार कर लिया.

अभय कुरुंदकर जिला ठाणे, पालघर के नवघर पुलिस थाने में बतौर इंचार्ज तैनात था. उस पर अपने ही विभाग की एक महिला अधिकारी अश्विनी बेंद्रे के अपहरण और हत्या जैसे गंभीर आरोप थे. अश्विनी बेंद्रे नवी मुंबई कोमोठे स्थित ह्यूमन राइट्स कमीशन औफिस में असिस्टेंट पुलिस इंसपेक्टर के रूप में तैनात थी.

25 वर्षीय अश्विनी राजू बेंद्रे मूलरूप से कोल्हापुर, तालुका आंधले, गांव हातकणगे की रहने वाली थी. वह 2007 के बैच की पुलिस अधिकारी थी. उस के पिता 1988 में आर्मी से रिटायर होने के बाद काश्तकारी में व्यस्त हो गए थे. परिवार में उन की पत्नी के अलावा 2 बेटियां और एक बेटा था. शिक्षा के साथ अश्विनी बेंद्रे हर काम में अपने छोटे भाई आनंद बेंद्रे और छोटी बहन से होशियार थी. चूंकि पिता आर्मी से थे, इसलिए वह बेटी की रुचि को देखते हुए उसे आर्मी या पुलिस सेवा में भेजना चाहते थे.

10वीं तक की शिक्षा अपने गांव के स्कूल से पूरी करने के बाद अश्विनी आगे की पढ़ाई के लिए अपने मामा के घर कोल्हापुर आ गई थी. उस के मामा कोल्हापुर में पुलिस अधिकारी थे. बीकौम करने के बाद वह एमपीएससी की तैयारी में जुट गई थी, लेकिन परीक्षा में शामिल होने से पहले ही उस के मातापिता ने राजकुमार उर्फ राजू गोरे से उस की शादी तय कर दी. 2005 में अश्विनी बेंद्रे विदा हो कर अपनी ससुराल चली गई.

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