सौजन्य-मनोहर कहानियां 

300गज में फैली उस कोठी में 2 बैडरूम और एक ड्राइंगरूम भूतल पर था, 2 बैडरूम और एक ड्राइंगरूम पहली मंजिल पर था. दाएं हिस्से में एक लंबी ओपन गैलरी कोठी के पीछे के हिस्से में बने गैराज तक गई थी. ऊपर की मंजिल में जाने के लिए सीढि़यां अंदर से भी थीं और बाहरी गैलरी से भी.

इस कोठी में एक ही परिवार रहता था. इस परिवार में मात्र 5 प्राणी थे- नरेश सेठी, उस की पत्नी पूर्णिमा सेठी और नौकर रामकिशन उर्फ रामू. नरेश सेठी का एकमात्र 8 वर्षीय बेटा विशु मसूरी के किसी पब्लिक स्कूल में पढ़ रहा था और बोर्डिंग में रहता था.

पूर्णिमा सेठी की लाश ऊपर की मंजिल के एक बैडरूम में डबल बैड पर पड़ी मिली थी. उसे गला घोंट कर मारा गया था. जिस चुन्नी से पूर्णिमा का गला घोंटा गया था, वह उसी की थी और उस के गले में ही लिपटी मिली थी.

पता चला कि पूर्णिमा सेठी सुबह साढ़े 9 बजे से दोपहर डेढ़ बजे तक घर में अकेली थी. उस का पति नरेश सेठी अपने औफिस गया हुआ था और नौकर रामू कनाट प्लेस. इसी बीच किसी समय पूर्णिमा का कत्ल हुआ था. पूर्णिमा की लाश सब से पहले दोपहर के डेढ़ बजे नौकर रामू ने देखी थी. उसी ने शोर मचा कर पासपड़ोस के लोगों की बुलाया था. उन्हीं में से किसी ने पुलिस को सूचना दी थी.

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जिस वक्त मैं मौका ए वारदात पर पहुंचा, उस समय पूर्णिमा का पति नरेश आ चुका था और इंसपेक्टर उसी से पूछताछ कर रहा था. नरेश ने बताया कि वह सुबह 9 बजे घर से निकला था. रास्ते में उसे 2-3 जगह जाना था, वहीं से होता हुआ वह पौने 2 बजे औफिस पहुंचा था. 2 बजे उसे औफिस में ही पूर्णिमा की हत्या की सूचना मिली थी.

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