‘‘हैलो, आप गुड़गांव पुलिस कंट्रोल रूम से बोल रहे हैं?’’ एक आदमी ने घबराई हुई आवाज में फोन पर पूछा.

‘‘हां, यह पुलिस कंट्रोल रूम ही है. आप बताएं, क्या कहना चाहते हैं.’’ ड्यूटी औफिसर ने कहा.

‘‘साहब, आप गुड़गांव से ही बोल रहे हैं न?’’ फोन करने वाले ने संतुष्टि के लिए पूछा.

‘‘हां, हम गुड़गांव से ही बोल रहे हैं.’’ ड्यूटी औफिसर ने संजीदगी से जवाब दिया.

‘‘साहब, मैं पंजाब के लुधियाना से रूपेंदर सिंह बोल रहा हूं.’’ फोन करने वाले ने कहा, ‘‘साहबजी, बात यह है कि मेरे रिश्तेदार हरनेक सिंह ढिल्लन ने अपनी बीवी को मार डाला है और खुद भी सुसाइड करने जा रहा है.’’ एक ही बार में उस ने अपनी बात कह डाली. फिर बोला, ‘‘साहब जी, हरनेक को बचा लीजिए.’’

‘‘रूपेंदर सिंह जी, पहले यह बताएं कि आप के रिश्तेदार रहते कहां हैं?’’ ड्यूटी औफिसर ने सवाल किया.

‘‘साहब, वह गुड़गांव के डीएलएफ फेज-2 में जे ब्लौक में रहता है.’’

‘‘ठीक है, हम पुलिस भेजते हैं.’’ ड्यूटी औफिसर ने रूपेंदर सिंह को भरोसा दिया. यह 20 अक्तूबर की बात है. समय रहा होगा सुबह के करीब 10 बजे का.

फोन पर रूपेंदर सिंह से मिली सूचना के आधार पर पुलिस कंट्रोल रूम ने डीएलएफ थाने को सूचना दी.

सूचना मिलने के कुछ ही देर बाद डीएलएफ थानाप्रभारी विष्णु प्रसाद कुछ पुलिस जवानों के साथ फेज-2 के जे ब्लौक के लिए रवाना हो गए. पुलिस 10 मिनट में मौके पर पहुंच गई. जे ब्लौक में पहुंच कर पुलिस ने हरनेक सिंह ढिल्लन के मकान के बारे में पूछताछ की. 2-4 लोगों से पूछताछ के बाद पुलिस को हरनेक सिंह के मकान का पता चल गया.

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