सौजन्या- सत्यकथा
 उत्तर प्रदेश का एक जिला है फिरोजाबाद. यह शहर कांच की नगरी के नाम से मशहूर है. यहां का एक थाना है रसूलपुर. इसी शहर के मशरूफगंज में मोहम्मद इरशाद अपने परिवार के साथ रहता था. उस के परिवार में 2 बेटियों के अलावा एक बेटा था. उस की सब से छोटी बेटी पौने 2 साल की मायरा थी. वह एक राजमिस्त्री था. बात 24 अगस्त, 2020 की है. शाम करीब 8 बजे बेटी मायरा अपने घर के बाहर खेलते समय अचानक लापता हो गई. इस की जानकारी होते ही बस्ती में हलचल मच गई. पड़ोसियों के साथ ही घर वाले मायरा की खोजबीन में जुट गए. लेकिन मायरा का कोई पता नहीं चला.
इस पर घर वालों ने मसजिद से ऐलान कराने के साथ ही चाइल्ड हेल्पलाइन में भी फोन कर दिया. इस के बाद वह रात साढ़े 10 बजे थाना रसूलपुर पहुंचा और बेटी के गायब होने की सूचना दी. सूचना मिलते ही थाना रसूलपुर थानाप्रभारी प्रमोद कुमार मलिक ने ढाई वर्षीय मायरा की गुमश्ुदगी दर्ज कर के जरूरी काररवाई शुरू कर दी. इरशाद की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी. इसलिए फिरौती के मकसद से उस के अपहरण की गुंजाइश नजर नहीं आ रही थी. पुलिस को लग रहा था कि किसी ने दुश्मनी में उसे गायब किया होगा. धीरेधीरे रात गहराती जा रही थी. मासूम बच्ची को लापता हुए कई घंटे बीत चुके थे. बच्ची के न मिलने से घर वाले परेशान हो गए थे. मां को चिंता थी कि उस की मासूम बच्ची कहां और किस अवस्था में होगी. रात लगभग साढ़े 12 बजे जब मायरा की खोजबीन की जा रही थी, उसी दौरान घर वालों को उस का शव मोहल्ले में स्थित ताड़ों वाली बगिया कब्रिस्तान के सामने पड़े होने की सूचना मिली.
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इरशाद और उस के घर वाले वहां पहुंचे तो मायरा की लाश देख कर बिलखबिलख कर रोने लगे. किसी ने उस मासूम बच्ची की हत्या गला रेत कर की थी. इस से बस्ती में सनसनी फैल गई. उसी समय किसी ने बच्ची की लाश मिलने की सूचना पुलिस को दे दी. सूचना मिलते ही थानाप्रभारी के अलावा एसएसपी सचिंद्र पटेल, एसपी (सिटी) मुकेशचंद्र मिश्र, सीओ (सिटी) हरिमोहन सिंह मौके पर पहुंच गए. अधिकारियों ने मौके पर पहुंच कर जांचपड़ताल की. मासूम का गला कटा हुआ था. जिस जगह बच्ची का शव मिला था वहां खून नहीं मिला. इस से इस बात की पुष्टि हो गई कि बच्ची की हत्या कहीं और क रने के बाद शव को यहां ला कर फेंका गया है. पुलिस ने मौके की काररवाई निपटाने के बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भिजवा दिया. इस संबंध में मृतक बच्ची मायरा के पिता इरशाद ने मोहल्ला मशरूफगंज के ही रहने वाले गफ्फार व उस के 3 बेटों वसीम, सलमान और अरबाज के खिलाफ हत्या की रिपोर्ट दर्ज कराई. पुलिस ने नामजद आरोपियों के खिलाफ भादंवि की धारा 302, 323, 504, 506 के अंतर्गत रिपोर्ट दर्ज कर काररवाई शुरू कर दी.
इरशाद ने आरोप लगाया गया था कि बेटी की हत्या साजिश के तहत की गई है. पहली अगस्त को भी गफ्फार और उस के बेटों ने उस के घर पर आ कर गालीगलौज करने के साथ ही जान से मारने की धमकी दी थी. वे लोग उस के भाई अबरार के ससुराल वाले हैं और हम लोगों से रंजिश मानते हैं. उस ने बताया कि इस की शिकायत पुलिस के अधिकारियों से की गई थी लेकिन आरोपियों के विरुद्ध कोई काररवाई नहीं की गई. इस के चलते उन्होंने हमारी बच्ची की हत्या कर दी. एसएसपी सचिंद्र पटेल ने इस जघन्य हत्याकांड के खुलासे के लिए एक टीम बनाई. टीम में थानाप्रभारी प्रमोद कुमार मलिक, एसओजी प्रभारी कुलदीप सिंह, एसआई सुशील कुमार, वासुदेव सिंह, कांस्टेबल आशीष शुक्ला व मुकेश कुमार, कन्हैया, जयनारायण, राजकुमार आदि को शामिल किया गया. पुलिस टीम ने नामजद आरोपियों के मकान पर दबिश डाली तो चारों आरोपी घर पर ही मिल गए. पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले कर पूछताछ शुरू कर दी. हिरासत में लिए गए आरोपियों ने अपने आप को निर्दोष बताया. उन्होंने बताया कि इरशाद उन के रिश्तेदार हैं और अपनी बेटी की हत्या के मामले में उन्हें झूठा फंसाना चाहते हैं. इस मामले में आप हम लोगों की पूरी तरह जांच करा लीजिए. अगर हम दोषी पाए जाएं तो हम हर सजा भुगतने को तैयार हैं. जिन लोगों पर हत्या का आरोप लगाया गया था, वे लोग पुलिस को घटना वाली रात घर पर ही मिले थे. इसलिए पुलिस ने उन के बारे में बारीकी से जांचपड़ताल शुरू की.
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जांच में पता चला कि आरोपी घटना वाली रात अपने घर में ही थे. वे घर से बाहर नहीं निकले थे. इस के अलावा पुलिस ने आरोपियों के पड़ोसियों व अन्य लोगों से बात की तो इस बात की पुष्टि हो गई कि जिन लोगों पर हत्या का आरोप लगाया गया है, वे निर्दोष हैं. असली कातिल तो कोई और है. पुलिस के शक की सुई अब बच्ची के घर वालों की तरफ घूम गई. पुलिस ने हाइवे पर घटनास्थल के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरे खंगाले तो बालिका की हत्या के कुछ सुराग हाथ लगे. जांच जैसेजैसे आगे बढ़ी शक गहराता गया. पूरी संतुष्टि के लिए सीसीटीवी फुटेज में जो व्यक्ति दिखे, सर्विलांस टीम ने उन व्यक्तियों के फोन नंबरों की लोकेशन पता की तो इस सनसनीखेज हत्याकांड की वास्तविकता को उजागर हो गई. सीसीटीवी कैमरे में घटना से पूर्व मायरा का पिता इरशाद उसे गोद में ले कर जाता दिखाई दे रहा था. शक पुख्ता होने पर पुलिस ने इरशाद को हिरासत में ले कर पूछताछ की तो पहले वह आनाकानी करता रहा. लेकिन जब सीसीटीवी फुटेज दिखाई व उस के मोबाइल की लोकेशन घटनास्थल पर मिलने की बात बताई तो उस ने बिलखते हुए अपनी बेटी मायरा की हत्या करने का जुर्म कबूल कर लिया.
इस हत्याकांड में उस का छोटा भाई मोहम्मद मुत्तलिव भी शामिल था. पुलिस ने उसे भी गिरफ्तार कर दोनों की निशानदेही पर हत्या में प्रयुक्त आलाकत्ल एक छुरी भी बरामद कर ली. अपने ही हाथों अपनी मासूम बेटी की हत्या करने के पीछे अपने विरोधियों को फंसाने और 3 लाख रुपए हड़पने की जो कहानी सामने आई, वह इस प्रकार निकली— पिछले दिनों सीएए (नागरिकता संशोधन अधिनियम) को ले कर फिरोजाबाद में हुए उपद्रव के दौरान कई लोगों की मौत हुई थी. उसी दौरान 20 दिसंबर, 2019 को इरशाद के भाई अबरार की भी मौत हो गई थी. मृतकों के घर वालों को कांग्रेस, समाजवादी पार्टी सहित इंडियन मुसलिम लीग ने अलगअलग आर्थिक मदद की थी. इरशाद के भाई अबरार की मौत पर इंडियन मुसलिम लीग ने इरशाद के पिता एजाज के नाम 3 लाख रुपए का चैक दिया था. जबकि अन्य दलों द्वारा दी गई मदद की राशि को ले कर अबरार की पत्नी फरहाना बेटे के साथ मशरूफगंज स्थित अपने पिता गफ्फार के पास चली गई थी. एजाज के नाम का 3 लाख रुपए का चैक इरशाद के पास था.
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मृतक अबरार की पत्नी व साले इस चैक पर अपना दावा जताते हुए चैक की मांग कर रहे थे. लेकिन इरशाद और छोटा भाई मुत्तलिव चैक देने को राजी नहीं थे. वे इस धनराशि को हड़पना चाहते थे. इसी को ले कर इरशाद और उस के भाइयों से अबरार के ससुरालीजनों का कई बार विवाद हो चुका था. इसी विवाद के चलते इरशाद ने अपने छोटे भाई मुत्तलिव के साथ मिल कर अबरार के ससुरालीजनों से छुटकारा पाने व चैक की लाखों रुपए की धनराशि को हड़पने के लिए खौफनाक साजिश रची. योजनानुसार 24 अगस्त, 2020 की रात जब इरशाद की ढाई वर्षीय बेटी मायरा घर के बाहर खेल रही थी, इरशाद उसे गोद में उठा कर ले गया. उस ने मासूम मायरा को खिलौना दिलाने का झांसा भी दिया. अपने पिता के साथ वह खुशीखुशी चली गई. उसे नहीं मालूम था कि उस का पालनहार अपने विरोधियों को फंसाने के लिए उस का ही कत्ल करने के लिए ले जा रहा है. मायरा का चाचा मुत्तलिव भी अपने साथ छुरी ले कर उस के पीछेपीछे आ गया. एक स्थान पर पिता इरशाद ने अपनी मासूम बेटी का गला छुरी से रेत कर उस की जघन्य हत्या कर दी. फिर दोनों भाई बच्ची के शव को कब्रिस्तान के सामने फेंक कर घर आ गए और मायरा के लापता होने की खबर फैला दी. दोनों कई दिनों से योजना को अमलीजामा पहनाने की फिराक में थे. लेकिन मायरा घर के बाहर भाईबहनों व अन्य बच्चों के साथ खेलती थी,
इस से वे घटना को अंजाम नहीं दे पा रहे थे. 24 अगस्त को उन्हें मौका मिल गया. उस दिन मायरा घर के बाहर अकेली मिल गई थी. हत्यारोपियों ने मृत भाई के ससुरालीजनों को केस में झूठा फंसाने की साजिश फूलप्रूफ बनाई थी, लेकिन पुलिस ने गहराई से जांच कर इस हत्याकांड का घटना के 5 दिन बाद 29 अगस्त को खुलासा कर दिया. गिरफ्तार पिता इरशाद व चाचा मुत्तलिव से पूछताछ करने के बाद पुलिस ने उन्हें कोर्ट में पेश कर जेल भेज दिया. इस घटना में कलयुगी पिता की ऐसी दास्तान सामने आई, जिस ने रिश्तों को शर्मसार कर दिया. घटना को सुन कर हर किसी की रूह कांप गई. जिस गोद में पिता का साया पा कर हर बच्चा अपने को सुरक्षित समझता है, उसी निर्दयी पिता ने अपने विरोधियों को हत्या के आरोप में फंसाने और मृतक भाई की विधवा व बच्चों के रुपयों को हड़पने के चक्कर में अपने ही कलेजे के टुकड़े को मौत के घाट उतार दिया.

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