आदरणीय अंकल जी,

प्रणाम

पिछले पांच दिनों से पुणे के अपने फ्लैट में अकेले पड़े-पड़े मैंने काफी कुछ सोचा है, सोचा आपको बता दूं. उम्मीद है पत्र पूरा पढ़ने के बाद आप मुझे पागल नहीं समझेंगे. लॉक डाउन के चलते कंपनी में कामकाज ठप्प पड़ा है घर से ही प्रोजेक्ट पूरा कर रहा हूं लेकिन माहौल देखते काम में मन नहीं लग रहा है.

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