सुबह सुबह चार बजे किसी मन्त्र की आवाज से मेघा की आंख खुली, लेटे लेटे माथे पर हाथ मारा , ओह्ह, फिर मां जी ने कोई ड्रामा शुरू किया है, मेघा का मन बेड छोड़ने का नहीं किया,  आजकल कोरोना वायरस के कारण कहने को तो वर्क फ्रॉम होम था, पर सारा दिन पल भर चैन न मिलता, ऊपर से मां जी के व्हाट्सएप्प पर मिले उनके फालतू के ज्ञान भरे उपदेश सुनने को मिलते, उन्हें समझाने में ही कितना टाइम चला जाता.

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