Dr Geetanjali Choudhary
दौड़ती भागती जिंदगी से आजादी कौन नहीं चाहता है? और उसमें भी तब जब आप को ऐसा लगे जिंदगी बहते पानी समान गुजर रही है. वक्त की मसरूफियत का तक़ाज़ा ऐसा मानो सुबह होती शाम होती है, जिंदगी यूँ ही तमाम होती है. सपनों की दुनिया में जीने वाली मुग्धा हमेशा अपने लिए क्वालिटी टाइम की कल्पना करती रहती थी.

वो हमेशा अपनी ही धुन में मगन रहती थी. पति के साथ खुबसूरत लम्हों की आकांक्षा, थोड़ा रोमांस, थोड़ी छेड़छाड़ की कल्पना मात्र से हृदय प्रेम से उन्मत्त हो जाता, तो वहीं मनन का देर से आफिस से घर आना, देर तक सोना और फिर तैयार होकर आफिस चले जाना उसके मन को कसैला कर देता था.

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