मेरा पुत्र प्रियेश आईटी का छात्र है. वह इंटरनैट पर देख कर औनलाइन कई चीजें मंगवाने की जिद करता रहता है. हम उसे मना करते हैं पर वह मानता नहीं. उस ने बिना बताए दिल्ली से 649 रुपए का 1 इलैक्ट्रौनिक शेवर मंगवाया. बहुत ही आकर्षक पैकिंग में हमें वह प्राप्त हुआ. मेरे बेटे ने उस में 2 नए सैल डाले और शेव करने लगा. आधे घंटे की कड़ी मेहनत के बाद भी वह ठीक से दाढ़ी न बना सका. वह परेशान हो गया. अंत में मेरे पास आ कर उस ने सब सचसच बता दिया. मैं ने अपने शहर के प्रतिष्ठित दुकानदार को वह उत्पाद दिखाया. उस ने कहा, ऐसे कई उत्पाद औनलाइन बेचे जाते हैं. आप दिनदहाड़े ठग लिए गए हैं.

मुकेश बत्रा, भुसावल (महा.)

पिछले सप्ताह मैं कोटला फिरोजशाह मैदान में आईपीएल का मैच देखने गया. स्टेडियम में खानेपीने का सामान ले जाना मना था. मुझे प्यास लगी तो पेप्सी कोला का गिलास 50 रुपए में लिया. मैं ने विक्रेता को 100 रुपए का नोट दिया. वह यह कह कर चला गया कि वह 50 रुपए ला रहा है. लेकिन मैच खत्म होने तक नहीं आया.

रूपलाल आहूजा, स्वास्थ्य विहार (दिल्ली)

कंपनी बाग मुरादाबाद के पास स्थित एकता द्वार को पार कर सड़क मार्ग से मैं अपने घर वापस आ रहा था. शाम 4 बजे का समय था. एकता द्वार से लगी सड़क से मैं थोड़ी दूर ही गया था, तभी साइकिल पर सवार एक लड़का मेरे सामने आ खड़ा हुआ और अपनी साइकिल मुझ से सटाने लगा. मैं ने उस से ऐसा न करने को कहा. परंतु मुझे एकांत में देख कर वह अपनी हरकत करता रहा. तभी एक दूसरा लड़का वहां आ गया. उस ने पहले वाले लड़के से कहा कि ये पितातुल्य हैं क्यों परेशान करते हो. इसी बीच पहले वाले लड़के ने मेरी कमीज की जेब में रखे रुपए पार कर लिए. गनीमत यह हुई कि मेरा पर्स जो कपड़े के थैले के अंदर था, जिसे मैं मजबूती से पकड़े हुए था, बच गया. थैले में काफी रकम, डाकघर व बैंक की पासबुकें व जरूरी कागजात थे. ठगी का पता घर आ कर चला.

कामेश्वर नाथ मेहरोत्रा, मुरादाबाद (उ.प्र.)

मैं पंजाब से दिल्ली आ रही थी. मेरे पास सामान के नाम पर एक अटैची और पर्स था. दिल्ली स्टेशन पर उतर कर मैं अपनी अटैची ले कर चल पड़ी. अभी कुछ कदम ही चली थी कि किसी ने पीछे से धक्का दिया. मैं गिर पड़ी. लोगों ने उठा कर पानी पिलाया. मुझे बिठाया. कुछ ठीक महसूस करने पर मैं अपनी अटैची देखने लगी, वह न मिली क्योंकि अटैची तो धक्का देने वाला ले कर फरार हो चुका था.

शशि जैन, नोएडा (उ.प्र.)

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