अपना महान देश अभी भी साधु, संतों, सपेरों और फकीरों का ही देश है जिन के बारे में आम धारणा यह है कि ये लोग जो भी करते हैं जनता के भले के लिए करते हैं. इस भले के लिए वे त्याग, तपस्या करते हैं और वस्त्र तक त्याग देते हैं. महात्मा गांधी इस लोकतांत्रिक फकीरी शृंखला की आखिरी कड़ी थे.

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