आप की संपादकीय टिप्पणी ‘कैसीनो जैसा क्रिकेट’ अद्वितीय है. आप ने भारतीय क्रिकेट की तुलना लास वेगास के जुआखाने से कर के मिसाल कायम कर दी है. अदालतें और मीडिया जितना इस की तह में जा रहे हैं उतना पता चलता है कि सब एक से बढ़ कर एक हैं.

इस विषय में सुप्रीम कोर्ट ने इतना कहा है कि श्रीनिवासन समेत अन्य12 खिलाडि़यों व अन्य सदस्यों पर गंभीर आरोप हैं. ?आप का यह कहना कि क्रिकेट राजनीति और नौकरशाही की तरह इस देश की संस्कृति की पोल खोलता है. राजनीति देशसेवा की जगह स्वयंसेवा और नौकरशाही अपने दायित्व से भटक कर मालिकशाही बन गई है. दोनों ने जनता को जम कर लूटा है और यह लूट जारी रहेगी, अक्षरश: सत्य है. भ्रष्टाचारमुक्त देश का चाहे जितना नारा दिया जाए, भारत भ्रष्टाचारमुक्त नहीं हो सकता क्योंकि बेईमानी इस देश की संस्कृति का हिस्सा है.

हमारे देश को ‘सोने की चिडि़या’ कहा जाता था. सोने की चिडि़या तो यह अब भी है. मगर भ्रष्टाचार, अत्याचार, अनाचार व लूटखसोट, घूसखोरी के कारण इस देश का सर्वनाश हो रहा है. लाखोंकरोड़ों लोग भूख से ग्रस्त हैं. उधर स्विस बैंक का खजाना भरता जा रहा है. देश फटेहाल होता जा रहा है और काले धन से स्विस बैंक आबाद होते जा रहे हैं.

कैलाश राम गुप्ता, इलाहाबाद (उ.प्र.)

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