आप की संपादकीय टिप्पणी ‘नए प्रधानमंत्री के लिए चुनौतियां’ पढ़ी. यह सर्वविदित है कि प्रधानमंत्री के समक्ष अनगिनत समस्याओं का समंदर लहरा रहा है. उन से लोगों की अपेक्षाएं काफी ज्यादा हैं. इस के लिए जनहित में धन, सामग्री, सुविधा के परिवहन तंत्र को उन्हें इतना पारदर्शी बनाना है कि सभी सुविधाएं आम जनता तक सीधे पहुंच सकें. गरीब, असहाय जनता के अधिकारों के मूल्य पर धनी और धनी कैसे होते गए, नेतागण व उन के रिश्तेदार अरबपति कैसे बन गए? प्रशासन तंत्र की यह कैसी पारदर्शिता है कि बिना चोरी किए जनहित का कोई काम ही संभव नहीं? इन के कारणों का निवारण करना है. प्रधानमंत्री की अपनी पार्टी भाजपा भी कोई दूध से धुली हुई नहीं है.

देश के अंदर छिपे हुए काले धन की बरामदगी से ही बहुत सारी समस्याओं का निदान हो सकता है. जिन मुद्दों को आधार बना, जनता को भरमा, उन को लड़ा कर बांटते हुए राजनीतिक पार्टियां सत्तारूढ़ होती हैं उन से भी उन्हें सख्ती से निबटना है. कालिखों से भरे शासकीय तंत्रों के विरुद्ध उन का हुंकार अभियान ही था जो विजयश्री की माला उन्हें अर्पित की गई. उस की अनुगूंज की प्रखरता को उन्हें बरकरार रखना होगा.

रेणु श्रीवास्तव, पटना (बिहार)

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