इंदिरा गांधी वाले आपातकाल में अच्छेअच्छे वक्ताओं की घिग्घी बंध गई थी. इंदिरा गांधी की तानाशाही पर बिना डरे जिन्होंने विरोध दर्ज कराया था, दुष्यंत कुमार त्यागी उन में से एक थे. दुष्यंत कुमार को हिंदी गजलों का गालिब कहा जाता है. उस दौर में उन्होंने जो गजलें कहीं वे आज भी गजलप्रेमियों के जेहन में संग्रहित हैं. इन दिनों जाने क्यों कइयों ने दोबारा उन की गजलों को याद करना शुरू कर दिया है.

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