नोटबंदी ने एक तरफ तो हर तरह के कारोबारी को परेशान कर रखा है. उसे खर्च के लिये बैंक में रखा अपना पैसा निकालने के लिये बैंक में लाइन लगने से लेकर बैंक कर्मियों की मनमानी से निपटना पड़ रहा है. इसके अलावा वह आयकर विभाग के भी निशाने पर है. पूरे देश का छोटे से लेकर बड़ा ऐसा कोई कारोबारी नहीं है जिसका शतप्रतिशत हिसाब साफ हो. आयकर विभाग का कानून ऐसा उलझाव वाला है जिसमें कुछ न कुछ कमी मिल ही जायेगी. आयकर विभाग के लिये ऐसे कारोबारी बेबस गाय की तरह हैं. इंसपेक्टर राज जिनको हलाल करने के लिये तैयार खड़ा है.

नोटबंदी के बाद तमाम कारोबारी आयकर के छापे का सामना कर रहे हैं. समझने वाली बात यह है कि आयकर विभाग को भ्रष्टाचार कर पैसा कमाने वाले नेता और अफसर नजर नहीं आ रहे हैं. कारोबारी कहते हैं कि बड़ी मुश्किल से आयकर और दूसरे सरकारी विभागों में इंसपेक्टर राज खत्म हो रहा था. नोटबंदी ने इंसपेक्टर राज को वापस ला दिया है. एक तरफ कारोबार में नुकसान हो रहा है तो दूसरी ओर इंसपेक्टर राज उसे डरा रहा है.

उत्तर प्रदेश लघु उद्योग निगम के उपाध्यक्ष और अखिल भारतीय उद्योग व्यापार मंडल के राष्ट्रीय अध्यक्ष संदीप बंसल कहते हैं ‘देश में व्यापारी वर्ग बहुसंख्यक है. देश के करीब 40 फीसदी लोग किसी न किसी तरह से बिजनेस से जुड़े हैं. नोटबंदी का फैसला करते समय इस बात का ध्यान नहीं रखा गया. ऐसा लगता है कि बिना किसी तैयारी के यह फैसला किया गया. जिससे तय समय सीमा के अंदर भी जनता को राहत नहीं मिल रही. नोटबंदी से केवल बैंक से पैसों की लेनदेन की ही परेशानी नहीं हो रही है. इस दौरान कारोबारी का बिजनेस जिस तरह से कम हो रहा है उसकी भरपाई कैसे होगी यह कोई नहीं सोच रहा.’

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