Toxic Movie Review: टौक्सिक फिल्म नहीं, बल्कि परदे पर मची भारी तबाही है, जो औडियंस के लिए सिरदर्द से कम नहीं. परदा जबतब लाल रंग से रंगा होता है, बंदूकों का शोर कानों के परदे फाड़ता रहता है और स्क्रीन पर बिना वजह सैक्स सीन आ जाते हैं. पहले आधे घंटे में ही 3-4 बार सैक्स सीन दिखा दिए गए हैं. लेकिन इस सब हंगामे के नीचे जो चीज पूरी तरह दब कर मर गई, वह है फिल्म की कहानी.
डायरैक्टर गीतू मोहनदास और रौकिंगस्टार यश ने मिल कर ‘अडल्ट्स-ओनली’ बनाने की कोशिश की थी, पर मिला क्या? तीन घंटे से ज्यादा लंबा एक ऐसा शोर, जिस में यह समझ पाना मुश्किल हो जाता है कि चल क्या रहा है और क्यों चल रहा है.
कहानी 1947 के गोवा के दौर में सेट है, जिस में गैंगस्टर्स राइवलरी और विरासत बनाने को दिखाया गया है. भारत आजाद हो रहा है, लेकिन गोवा पर पुर्तगालियों का कब्जा है. इसी दौरान अफीम के काले कारोबार में 2 भाईबहन कदम रखते हैं- राया (यश) और उस की बहन गंगा (नयनतारा). दोनों का बचपन ट्रामा में बीता है. राया को सिर्फ 2 चीजें आती हैं, दुश्मनों की लाशें बिछाना और अलगअलग महिलाओं के साथ सोना.
उस की जिंदगी में साल्वाडोर की बेटी रेबेका (तारा सुतारिया) आती है, फिर सर्कस चलाने वाली नादिया (कियारा आडवाणी) से उसे प्यार होता है. बाद में मेलिसा (रुक्मिणी वसंत) की एंट्री होती है. दूसरी तरफ एलिजाबेथ (हुमा कुरैशी) अपने भाई डोनी (अक्षय ओबेरोय) के साथ मिल कर राया और गंगा से बदला लेने की फिराक में है. फिल्म में इतने सारे किरदारों और किस्सों को एकसाथ ठूंस दिया गया है कि ठीक से कनैक्ट कर पाना मुश्किल होता है, ऊपर से ऐसा लगता है मानो फिल्म किरदारों के स्वैग, फैशन और स्टाइल की नुमाइश करने मात्र के लिए रह गई है.
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