बौलीवुड के हालात सुधरने का नाम ही नहीं ले रहे हैं. एक तरफ 80 प्रतिशत सिनेमाघर बंद चल रहे हैं तो दूसरी तरफ फिल्म निर्माता सुधरने का नाम नहीं ले रहे हैं.
फिल्म निर्माता जिस तरह से अपनी फिल्मों को प्रदर्शित कर रहे हैं. उस से अहसास होता है कि वह ‘सब्सिडी’ की रकम बटोरने या ओटीटी प्लेटफार्म पर अपनी फिल्म बेचने के लिए आवश्यक शर्त पूरी करने के लिए फिल्म को प्रदर्शित कर खाना पूर्ति मात्र ही कर रहे हैं. उन्हें इस बात की परवाह ही नहीं है कि उन की फिल्म से दर्शक परिचित हों और उन की फिल्म कमाई करे.
इसी तरह से मई माह के तीसरे सप्ताह यानी कि 17 मई को निर्देशक सोहम शाह की फिल्म ‘‘करतम भुगतम’’ प्रदर्शित हुई, जिस में श्रेयश तलपडे़, विजय राज,मधु व अक्षा पारदर्शिनी ने अहम किरदार निभाए हैं. यह सायकोलौजिकल थ्रिलर फिल्म कर्म और उस के फल के साथ ही ज्योतिष की भी बात करती है.
फिल्म ‘‘करतम भुगतम’’ को प्रदर्शित करने से पहले कोई प्रचार नहीं किया गया. इस फिल्म का टीजर या ट्रेलर कब आया, यह भी पता नहीं चला. यहां तक कि 17 मई को फिल्म चुपचाप प्रदर्शित कर दी गई. आम दर्शक को तो छोड़िए, पत्रकारों को भी पता नहीं चला कि ‘करतम भुगतम’ नाम की कोई फिल्म प्रदर्शित हो रही है.
यानी कि ‘जंगल में मोर नाचा, किस ने देखा..’ वाली कहावत चरितार्थ हो गई. इतना ही नहीं भूले भटके जो दर्शक सिनेमाघर पहुंच गए, वे इस फिल्म के साथ जुड़ नहीं सके. फिल्म के निर्माता फिल्म के बजट को ले कर चुप्पी साधे हुए हैं. तो वहीं यह फिल्म की कमाई पूरे एक सप्ताह में एक करोड़ भी नहीं हुई. निर्माता के हाथ में चाय पीने के भी पैसे नहीं आए...
बिना किसी प्रचार के फिल्म ‘करतम भुगतम’ को प्रदर्शित करने के पीछे निर्माता की क्या सोच रही है, यह तो वही जाने. आखिर उस ने अपने सारे पैसे क्यों डुबाए यह भी वही जाने. इस तरह फिल्म को प्रदर्शित कर निर्माता सरकार से ‘सब्सिडी’ भले हासिल कर ले, पर कोई ओटीटी प्लेटफार्म इस तरह की फिल्म में रूचि दिखाएगा, ऐसा हमें तो नहीं लगता.

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