Dadi Ki Shaadi Review: आज के दौर में जहां परिवार एक ही घर में रह कर भी एकदूसरे से दूर होते जा रहे हैं, वहां ‘दादी की शादी’ रिश्तों की उसी खोती गर्माहट को वापस पकड़ने की कोशिश करती है. फिल्म यह सवाल उठाती है कि क्या बुजुर्गों को सिर्फ दवाइयों, पूजापाठ और अकेलेपन तक सीमित कर देना चाहिए? क्या उन्हें दोबारा प्यार करने या अपनी जिंदगी अपने तरीके से जीने का हक नहीं है? इसी सोच के इर्दगिर्द घूमती है यह पूरी फिल्म.
शिमला की खूबसूरत वादियों में रहने वाली विमला आहूजा (नीतू कपूर) अकेली जिंदगी बिता रही हैं. उन के 2 बेटे हैं. बड़ा बेटा जीवन (दीपक दत्ता) दिल्ली में पत्नी अनीता और बेटी कन्नू (सादिया खतीब) के साथ रहता है जबकि छोटा बेटा नाग (जितेंद्र हुड्डा) चंडीगढ़ में अपने परिवार के साथ सैटल है. बेटी सुनैना विदेश में रहती है. तीनों बच्चे अपनीअपनी जिंदगियों में इतने व्यस्त हैं कि मां से मिलने का वक्त नहीं निकाल पाते.
इधर दिल्ली में कन्नू की शादी टोनी कालरा (कपिल शर्मा) से तय होती है. टोनी का बाप बड़ा बिजनैसमैन है. सगाई वाले दिन टोनी का पूरा परिवार जीवन के घर लड़की देखने आता है. सगाई का माहौल है, ढोलनगाड़े हैं, खुशियां हैं. लेकिन उसी दौरान शिमला में विमला फेसबुक चलाना सीखते हुए गलती से पोस्ट कर देती हैं, ‘आई एम गेटिंग मैरिड सून’.
दरअसल, वे अपनी पोती की शादी के बारे में लिखना चाहती थीं. पोस्ट वायरल होती है और पूरे परिवार में भूचाल आ जाता है. टोनी का परिवार रिश्ता तोड़ देता है और बच्चों को लगता है कि मां ने इस उम्र में शादी की बात कह कर उन की इज्जत मिट्टी में मिला दी. इस के बाद पूरा परिवार शिमला पहुंचता है, मकसद सिर्फ दादी की शादी रुकवाना. लेकिन सालों बाद बच्चों को अपने घर में देख कर विमला खुश हो जाती हैं. पर जब उन्हें पता चलता है कि सब शादी रुकवाने आए हैं, तो वे टूट जाती हैं. उन्हें एहसास होता है कि बच्चे प्यार से नहीं, बल्कि अपनी ‘सोसायटी वाली इमेज’ बचाने आए हैं, यहां फिल्म इमोशनल मोड़ लेती है.
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