Midterm Elections: अमिरिकी मूल के लोग और व्हाइट इवेंजिलिकल ईसाई उद्दंड और आलसी भले ही हों लेकिन वे बहुत ज्यादा कम से कम भारतीय सनातनियों जितने मूर्ख नहीं हैं. जिन्होंने मध्यावधि चुनाव में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और उनकी रिपब्लिकन पार्टी को धूल चटाने में अहम रोल निभाया. ये वही लोग हैं जिन्होंने 2022 के चुनाव में ट्रम्प के प्रति अपार अंधभक्ति दिखाई थी. अब ऐसा क्या हो गया कि ट्रम्प से इनका मोह भंग हो रहा है.

इस सवाल का हालफ़िलहाल तो धुरंधर से धुरंधर सियासी पंडित भी नहीं ढूंढ पा रहे. हाँ, एक स्वर में सभी यह जरुर स्वीकार रहे हैं कि अब अमेरिका दक्षिणपंथी चर्च की राजनीति से लगभग मुक्त हो गया है और ट्रम्प की मनमानी पर लगाम कस गई है. वे न तो कांग्रेस यानी संसद से कोई नया कानून पास करा पाएंगे और न ही नीतिगत फैसले ले पाएंगे.

बीती 3 नवम्बर को आए नतीजों में डेमोक्रेटिक पार्टी ने निचले सदन यानी हाउस आफ रिप्रेजेटेटिव्स की 435 में से 255 सीटें जीतकर इतिहास रच दिया है. रिपब्लिकन पार्टी उससे बहुत पीछे 175 सीटों पर सिमट कर रह गई . उच्च सदन सीनेट की 100 में से 35 सीटों के लिए चुनाव हुआ था इनमे भी डेमोक्रेटिक पार्टी ने 21 सीटें जीतकर दुनिया भर को चौंका दिया है रिपब्लिकन पार्टी को महज 14 सीटों से तसल्ली करना पड़ी..अब सीनेट में डेमोक्रेटिक पार्टी की 54 सीटें हो गई हैं जबकि रिपब्लिकन पार्टी 44 पर रह गई है.

सफ़ेद ईसाईयों का अमेरिका को रूढ़िवादी ईसाई राष्ट्र बनाने का सपना किस कदर ध्वस्त हुआ है इसका अंदाजा एक इसी बात से लगाया जा सकता है कि इस मिड टर्म में रिपब्लिकन पार्टी के लगभग सभी गढ़ ढह गए. मसलन टेक्सास, ओहोयो, नार्थ और साउथ कैरोलिना और मेन सहित कसास जहाँ से 1932 के बाद डेमोक्रेटिक पार्टी का उम्मीदवार जीता. टेक्सास में भी आखिरी बार 1988 में उसका उम्मीदवार जीता था. ये राज्य रिपब्लिकन पार्टी के वैसे ही गढ़ माने जाते रहे हैं जैसे भाजपा के लिए मध्यप्रदेश, गुजरात और उत्तरप्रदेश सहित तमाम हिंदी भाषी राज्य हुआ करते हैं.

कहने को तो मुख्य चुनावी मुद्दे महंगाई, युद्ध और टेम्प के सनक भरे फैसले हैं लेकिन असल में अमेरिका में हुआ यह है कि युवाओं ने बिना सड़कों पर आए ट्रम्प को सडक पर ला दिया है. वजह उनकी चर्च नीति थी जिसे लेकर अमेरिकी युवा असहज महसूस कर रहा था. उसे धार्मिक नहीं बल्कि लोकतंत्र बाला देश चाहिए था. नतीजों के बाद आए सर्वे बता रहे हैं कि महज 25 फीसदी युवाओ ने ही रिपब्लिकन पार्टी को वोट दिया जबकि 75 फीसदी ने डेमोक्रेटिक पार्टी पर भरोसा जताया. Midterm Elections

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